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अलग से सो सकता है थोड़ा सा दिमाग

१ मई २०११

आपको याद नहीं आ रहा है कि कहां आपने चाबी का गुच्छा रख दिया है या चश्मा कहां रखा है. आप सोच रहे हैं कि आप भुलक्कड़ हो चुके हैं. नहीं ऐसी बात नहीं, आपकी नींद पूरी नहीं हो रही है.

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This image issued by the York Archaeological Trust on Friday Dec. 12, 2008 shows brain material as dark folded matter at the top of the head in this computer-generated view into the skull. British archaeologists working at a university campus have unearthed an ancient skull carrying a startling surprise _ an unusually well-preserved brain still inside. Scientists said Friday that the more than 2,000-year-old mass of gray matter was the oldest ever discovered in Britain. One expert unconnected with the find called it "a real freak of preservation." The skull _ which was severed from its corpse sometime before the Roman invasion of Britain _ was found in a muddy pit during a dig at the University of York in northern England in the fall of this year, according to Richard Hall, a director of York Archaeological Trust. (AP Photo/York Archaeological Trust, Ho) ** EDITORIAL USE ONLY NO SALES **
तस्वीर: AP

चूहों पर किए गये एक अध्ययन से इसका पता चला है. इस अध्ययन के अनुसार अगर मस्तिष्क थक जाए, तो इसके कुछ हिस्से एक सेकंड से भी कम समय के लिए नींद में डूब सकते हैं, जबकि बाकी हिस्से पूरी तरह से जगे होते हैं.

इस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके नतीजे खासकर उस हालत में निर्णायक हो सकते हैं, जब कोई ऐसा काम किया जा रहा है जिसमें लगातार सजग रहना जरूरी है. मिसाल के तौर पर गाड़ी चलाना.

In einem Labor der Klinik für Neurologie am Universitätsklinikum Jena trägt die Probandin Christin Lemke am 04.12.2008 eine mit vielen Elektroden versehene Haube zur Messung vor Hirnströmen. Dieses Prinzip des Elektroenzephalogramms (EEG) ist 1924 vom Jenaer Psychologen Hans Berger (1873-1941) erfunden worden, Berger veröffentlichte seine Forschungen zur Messung der Gehirnaktivitäten jedoch erst 1929. Das EEG ist auch heute noch ein wichtiges Verfahren der medizinischen Diagnostik, das die moderne Technik des Magnetenzephalogramms (MEG) ergänzt. Foto: Jan-Peter Kasper dpa/lth +++(c) dpa - Bildfunk+++
तस्वीर: dpa

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन में मनोरोग चिकित्सा के प्रोफेसर चियारा सिरेल्ली का कहना है, "थकावट महसूस करने से पहले भी मस्तिष्क में ऐसे संकेत देखे जा सकते हैं. न्यूरॉन के कुछ ग्रुप नींद में ढल सकते हैं, जिनका घातक असर पड़ सकता है."

ब्रिटिश जर्नल नेचर में प्रकाशित इस अध्ययन में अब तक प्रचलित इस धारणा का खंडन किया गया है कि सोते समय सारा मस्तिष्क प्रभावित होता है. इलेक्ट्रो एन्सेफालोग्राम या ईईजी के आधार पर ऐसे निष्कर्ष निकाले गए थे. लेकिन ईईजी की सीमाएं होती हैं.

इस नई रिसर्च में 11 वयस्क चूहों के मस्तिष्क में बारीक तार डालकर अलग अलग हिस्सों में इलेक्ट्रो एक्टिविटी की जांच की गई और साथ ही ईईजी भी किया गया. नतीजे में देखा गया कि कुछ हिस्सों में न्यूरॉन निष्क्रिय होने के बाद भी ईईजी पर कोई असर नहीं पड़ा. लेकिन चूहों के सामान्य व्यवहार में परिवर्तन देखे जा सके.

इस रिसर्च का दावा है कि चूहों की तरह मनुष्य के व्यवहार पर भी आंशिक नींद का असर पड़ता है.

रिपोर्टः एजेंसियां/उभ

संपादनः वी कुमार

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